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BPSC इतिहास – आधुनिक भारतीय इतिहास के संपूर्ण अध्ययन नोट्स

Read the important current affairs of 15 July 2026 for SSC, Banking, UPSC, Railway and all competitive exams.

28 Sep 2026 5 Min Read Quizer Team 13 Views

28

September 2026

BPSC Prelims और Mains के लिए आधुनिक भारतीय इतिहास के संपूर्ण हिंदी नोट्स। ब्रिटिश शासन, प्लासी, बक्सर, 1857, कांग्रेस, गांधी युग, चंपारण सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन और स्वतंत्रता तक महत्वपूर्ण विषय पढ़ें।


आधुनिक भारतीय इतिहास BPSC परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है। BPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम में आधुनिक भारत के अंतर्गत ब्रिटिश सत्ता की स्थापना, औपनिवेशिक प्रशासन और आर्थिक नीतियाँ, सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन, 1857 का विद्रोह, किसान एवं जनजातीय आंदोलन, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, गांधी युग, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, भारतीय राष्ट्रीय सेना, 1946 का नौसैनिक विद्रोह, विभाजन और स्वतंत्रता जैसे विषय शामिल हैं।

ये नोट्स BPSC Prelims और Mains दोनों की तैयारी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।


1. भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन

भारत में यूरोपीय शक्तियाँ मुख्यतः व्यापार और आर्थिक लाभ के उद्देश्य से आईं।

पुर्तगाली

  • वास्को-डि-गामा 1498 में कालीकट पहुँचा।

  • भारत में समुद्री मार्ग से पहुँचने वाला पहला प्रमुख यूरोपीय व्यापारिक समूह पुर्तगाली था।

  • अल्फांसो डी अल्बुकर्क ने भारत में पुर्तगाली शक्ति के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • 1510 में पुर्तगालियों ने गोवा पर अधिकार किया।

डच

  • डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1602 में हुई।

  • डचों का मुख्य उद्देश्य व्यापार, विशेषकर मसालों के व्यापार में लाभ प्राप्त करना था।

अंग्रेज

  • अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में हुई।

  • प्रारंभ में कंपनी का उद्देश्य व्यापार था।

  • धीरे-धीरे कंपनी ने राजनीतिक और सैन्य शक्ति का विस्तार किया।

फ्रांसीसी

  • फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 में हुई।

  • भारत में फ्रांसीसियों के प्रमुख केंद्रों में पांडिचेरी, चंद्रनगर, माहे, कराईकल और यनम शामिल थे।


2. भारत में ब्रिटिश सत्ता का विस्तार

ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे व्यापारिक संस्था से राजनीतिक शक्ति का रूप लिया।

ब्रिटिश विस्तार की प्रमुख घटनाएँ:

  • प्लासी का युद्ध – 1757

  • बक्सर का युद्ध – 1764

  • इलाहाबाद की संधि – 1765

  • सहायक संधि की नीति

  • विलय की नीति

  • विभिन्न भारतीय राज्यों का क्रमिक अधिग्रहण

NCERT भी 1757 से 1857 के बीच कंपनी द्वारा राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक तरीकों से भारतीय राज्यों में प्रभाव बढ़ाने की प्रक्रिया को रेखांकित करता है।


3. प्लासी का युद्ध – 1757

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 को हुआ।

प्रमुख पक्ष

अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी

  • नेतृत्व: रॉबर्ट क्लाइव

बंगाल के नवाब

  • सिराजुद्दौला

ब्रिटिश विजय के बाद बंगाल में कंपनी का राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ऐतिहासिक स्रोत भी प्लासी के बाद ब्रिटिश शक्ति के विस्तार को महत्वपूर्ण मानते हैं।

BPSC के लिए महत्व

प्लासी का युद्ध कंपनी के व्यापारिक प्रभाव को राजनीतिक शक्ति में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण घटना था।


4. बक्सर का युद्ध – 1764

बक्सर का युद्ध अक्टूबर 1764 में हुआ।

अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध संयुक्त पक्ष

  • मीर कासिम – बंगाल

  • शुजाउद्दौला – अवध

  • शाह आलम द्वितीय – मुगल सम्राट

ब्रिटिश सेना का नेतृत्व हेक्टर मुनरो ने किया।

भारत सरकार के Azadi Ka Amrit Mahotsav स्रोत के अनुसार बक्सर में कंपनी की निर्णायक विजय हुई और 1765 की इलाहाबाद संधि के बाद राजनीतिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया।

महत्व

बक्सर की विजय ने बंगाल, बिहार और उत्तर भारत में कंपनी की राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया।


5. दीवानी अधिकार – 1765

1765 की इलाहाबाद संधि के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी, अर्थात राजस्व वसूली का अधिकार प्राप्त हुआ।

महत्व

इससे कंपनी को विशाल राजस्व संसाधन प्राप्त हुए और भारत में उसकी राजनीतिक एवं आर्थिक शक्ति मजबूत हुई।


6. बंगाल में द्वैध शासन

रॉबर्ट क्लाइव ने 1765 में बंगाल में द्वैध शासन की व्यवस्था लागू की।

इस व्यवस्था में:

  • कंपनी के पास राजस्व संबंधी अधिकार थे।

  • नवाब के पास प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ औपचारिक रूप से बनी रहीं।

बाद में वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1772 में इस व्यवस्था को समाप्त किया।


7. प्रमुख ब्रिटिश गवर्नर-जनरल और उनकी नीतियाँ

वॉरेन हेस्टिंग्स

प्रमुख कार्य:

  • द्वैध शासन की समाप्ति

  • प्रशासनिक सुधार

  • न्यायिक सुधार

  • कंपनी शासन को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास

लॉर्ड कॉर्नवालिस

प्रमुख कार्य:

  • स्थायी बंदोबस्त

  • प्रशासनिक सुधार

  • न्यायिक सुधार

  • सिविल सेवा संबंधी सुधार

लॉर्ड वेलेजली

सबसे महत्वपूर्ण नीति:

सहायक संधि (Subsidiary Alliance)

लॉर्ड विलियम बेंटिक

प्रमुख कार्य:

  • 1829 में सती प्रथा का उन्मूलन

  • प्रशासनिक सुधार

  • शिक्षा संबंधी नीतियाँ

लॉर्ड डलहौजी

प्रमुख नीतियाँ:

  • विलय की नीति

  • रेलवे के विकास को बढ़ावा

  • टेलीग्राफ

  • डाक व्यवस्था में सुधार

  • ब्रिटिश क्षेत्रीय विस्तार


8. सहायक संधि की नीति

सहायक संधि की नीति मुख्य रूप से लॉर्ड वेलेजली से जुड़ी है।

इसके अंतर्गत भारतीय शासकों को ब्रिटिश सैन्य संरक्षण स्वीकार करना पड़ता था और उनके राज्य में ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती की व्यवस्था की जाती थी।

इस नीति ने कई भारतीय राज्यों की स्वतंत्र विदेश नीति और राजनीतिक स्वायत्तता को कमजोर किया।


9. विलय की नीति

लॉर्ड डलहौजी की विस्तारवादी नीति को सामान्यतः Doctrine of Lapse / विलय की नीति के नाम से जाना जाता है।

इस नीति के अंतर्गत कुछ ऐसे राज्यों को ब्रिटिश शासन में मिला लिया गया जहाँ शासक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार को ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार नहीं किया।

प्रमुख उदाहरण:

  • सतारा

  • झाँसी

  • नागपुर

  • संभलपुर

यह नीति 1857 के विद्रोह से पहले ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष बढ़ाने वाले कारकों में शामिल थी।


10. भू-राजस्व व्यवस्थाएँ

ब्रिटिश शासन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग भू-राजस्व व्यवस्थाएँ लागू की गईं।

स्थायी बंदोबस्त

  • 1793

  • लॉर्ड कॉर्नवालिस से संबंधित

  • मुख्यतः बंगाल क्षेत्र में लागू

  • जमींदारों के माध्यम से राजस्व व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था

प्रमुख रूप से:

  • मद्रास

  • बॉम्बे

क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में लागू की गई।

इसमें सरकार और कृषक के बीच अपेक्षाकृत प्रत्यक्ष राजस्व संबंध था।

महालवाड़ी व्यवस्था

मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी प्रांतों और कुछ अन्य क्षेत्रों में लागू की गई।

इसमें राजस्व निर्धारण में गाँव या महाल को एक इकाई के रूप में लिया जाता था।


11. रेगुलेटिंग एक्ट – 1773

1773 का रेगुलेटिंग एक्ट कंपनी के प्रशासन पर ब्रिटिश संसद के नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।

प्रमुख प्रावधान:

  • बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाया गया।

  • वॉरेन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल बने।

  • कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान हुआ।


12. पिट्स इंडिया एक्ट – 1784

इस अधिनियम ने ब्रिटिश सरकार के कंपनी के भारतीय मामलों पर नियंत्रण को और मजबूत किया।

मुख्य प्रावधान:

  • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना

  • कंपनी के राजनीतिक मामलों पर ब्रिटिश सरकार का अधिक नियंत्रण

  • प्रशासन में दोहरे नियंत्रण की व्यवस्था


13. चार्टर एक्ट

चार्टर एक्ट 1813

  • कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को काफी हद तक समाप्त किया गया।

  • कुछ विशेष व्यापारिक क्षेत्रों में कंपनी का एकाधिकार जारी रहा।

  • ईसाई मिशनरियों को भारत में कार्य करने की अनुमति मिली।

चार्टर एक्ट 1833

  • कंपनी की व्यापारिक गतिविधियों का अंत हुआ।

  • बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया।

  • लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने।

चार्टर एक्ट 1853

  • विधायी और कार्यकारी कार्यों के बीच अधिक स्पष्ट विभाजन हुआ।

  • सिविल सेवा में प्रतियोगी भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।


14. सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन

19वीं शताब्दी में भारत में कई सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलनों का विकास हुआ।

इन आंदोलनों ने सामाजिक कुरीतियों, शिक्षा, महिलाओं की स्थिति, जाति व्यवस्था और धार्मिक सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा दिया।


15. ब्रह्म समाज

राजा राममोहन राय ने 1828 में ब्रह्म सभा की स्थापना की, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज के रूप में विकसित हुई।

प्रमुख विचार:

  • एकेश्वरवाद

  • सामाजिक सुधार

  • शिक्षा

  • सती प्रथा का विरोध

  • महिलाओं की स्थिति में सुधार

राजा राममोहन राय को आधुनिक भारत के प्रमुख सामाजिक सुधारकों में गिना जाता है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्रोत भी उनके सामाजिक सुधार संबंधी योगदान को रेखांकित करते हैं।


16. सती प्रथा का उन्मूलन

1829 में लॉर्ड विलियम बेंटिक के शासनकाल में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया गया।

राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध सामाजिक और बौद्धिक अभियान चलाया था।


17. आर्य समाज

स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की।

मुख्य विचार:

  • वेदों की ओर लौटने का आह्वान

  • शिक्षा का प्रसार

  • सामाजिक सुधार

  • धार्मिक रूढ़ियों की आलोचना


18. रामकृष्ण मिशन

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

मुख्य क्षेत्र:

  • शिक्षा

  • सामाजिक सेवा

  • मानव कल्याण

  • आध्यात्मिक विकास


19. 1857 का विद्रोह

1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 19वीं शताब्दी का एक बड़ा सशस्त्र विद्रोह था।

NCERT के अनुसार इसके कारण, स्वरूप, प्रसार और प्रभाव को समझना आधुनिक भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तत्काल कारण

एनफील्ड राइफल के कारतूसों को लेकर सैनिकों में यह धारणा फैल गई कि उन पर गाय और सूअर की चर्बी लगी है। इससे हिंदू और मुस्लिम सैनिकों में धार्मिक भावनाएँ आहत होने की आशंका बढ़ी।

प्रारंभ

विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुआ और इसके बाद दिल्ली तथा उत्तर एवं मध्य भारत के कई क्षेत्रों में फैल गया।

प्रमुख नेता

क्षेत्रप्रमुख नेता
दिल्लीबहादुर शाह जफर
कानपुरनाना साहेब
झाँसीरानी लक्ष्मीबाई
लखनऊबेगम हजरत महल
बिहारबाबू कुंवर सिंह
बरेलीखान बहादुर खान

20. बिहार में 1857 का विद्रोह – बाबू कुंवर सिंह

बिहार में 1857 के विद्रोह के प्रमुख नेताओं में बाबू कुंवर सिंह का नाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

वे जगदीशपुर से संबंधित थे और उन्होंने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया।

BPSC के लिए महत्वपूर्ण बिंदु:

  • क्षेत्र: जगदीशपुर, भोजपुर

  • विद्रोह: 1857

  • भूमिका: बिहार में विद्रोह के प्रमुख नेता


21. 1857 के विद्रोह के परिणाम

1857 के विद्रोह के बाद:

  • ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ।

  • भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन के अधीन चला गया।

  • भारत सरकार अधिनियम 1858 लागू हुआ।

  • भारत सचिव का पद बनाया गया।

  • गवर्नर-जनरल को वायसराय के रूप में भी जाना जाने लगा।


22. भारत सरकार अधिनियम – 1858

इस अधिनियम ने भारत में कंपनी शासन का अंत किया और ब्रिटिश क्राउन को प्रत्यक्ष शासन सौंपा।

यह आधुनिक भारतीय संवैधानिक इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव था।


23. किसान और जनजातीय आंदोलन

BPSC के आधिकारिक syllabus में किसान एवं जनजातीय आंदोलनों के साथ विशेष रूप से नील विद्रोह, दक्कन दंगे और मोपला विद्रोह का उल्लेख किया गया है।

महत्वपूर्ण आंदोलन:

  • नील विद्रोह

  • संथाल विद्रोह

  • बिरसा मुंडा आंदोलन

  • दक्कन दंगे

  • मोपला विद्रोह

  • विभिन्न स्थानीय किसान आंदोलन


24. नील विद्रोह

नील की खेती से जुड़े किसानों पर औपनिवेशिक काल में कई प्रकार के दबाव थे।

बंगाल में नील किसानों के विरोध ने नील विद्रोह का रूप लिया।

यह आंदोलन औपनिवेशिक कृषि व्यवस्था और नील की जबरन/दबावपूर्ण खेती से जुड़ा था।

BPSC syllabus में नील विद्रोह को विशेष रूप से आधुनिक भारत के किसान आंदोलनों के अंतर्गत रखा गया है।


25. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई।

प्रथम अधिवेशन

  • वर्ष: 1885

  • स्थान: बॉम्बे

  • अध्यक्ष: डब्ल्यू. सी. बनर्जी

  • ए. ओ. ह्यूम ने कांग्रेस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


26. उदारवादी चरण

कांग्रेस के प्रारंभिक नेताओं को सामान्यतः उदारवादी कहा जाता है।

प्रमुख नेता:

  • दादाभाई नौरोजी

  • गोपाल कृष्ण गोखले

  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी

  • फिरोजशाह मेहता

  • डब्ल्यू. सी. बनर्जी

प्रमुख तरीके

  • संवैधानिक सुधारों की मांग

  • याचिकाएँ

  • प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से मांग

  • सार्वजनिक सभाएँ

  • प्रशासनिक सुधारों की मांग


27. दादाभाई नौरोजी और धन-निकासी सिद्धांत

दादाभाई नौरोजी ने भारत से ब्रिटेन की ओर आर्थिक संसाधनों के प्रवाह को समझाने के लिए Drain of Wealth Theory प्रस्तुत की।

उनकी प्रसिद्ध पुस्तक:

Poverty and Un-British Rule in India

यह सिद्धांत औपनिवेशिक आर्थिक शोषण की आलोचना का महत्वपूर्ण आधार बना।


28. उग्र राष्ट्रवादी चरण

प्रमुख नेता:

  • बाल गंगाधर तिलक

  • लाला लाजपत राय

  • बिपिन चंद्र पाल

इन नेताओं को सामान्यतः लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता है।

प्रमुख विचार:

  • स्वदेशी

  • बहिष्कार

  • राष्ट्रीय शिक्षा

  • स्वशासन की मांग


29. बंगाल विभाजन – 1905

लॉर्ड कर्जन के समय 1905 में बंगाल का विभाजन किया गया।

इसके विरोध में व्यापक आंदोलन हुआ और स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन को गति मिली।

बंगाल विभाजन को 1911 में रद्द कर दिया गया।


30. स्वदेशी आंदोलन

स्वदेशी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय वस्तुओं और उद्योगों को बढ़ावा देना तथा विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को प्रोत्साहित करना था।

प्रमुख गतिविधियाँ:

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

  • स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग

  • राष्ट्रीय शिक्षा

  • भारतीय उद्योगों को बढ़ावा


31. मुस्लिम लीग की स्थापना

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में ढाका में हुई।

यह औपनिवेशिक भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।


32. सूरत विभाजन – 1907

1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर उदारवादियों और उग्र राष्ट्रवादियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए।

इसे कांग्रेस के इतिहास में सूरत विभाजन के नाम से जाना जाता है।


33. होम रूल आंदोलन

1916 के आसपास होम रूल आंदोलन प्रमुख रूप से सामने आया।

प्रमुख नेता:

  • बाल गंगाधर तिलक

  • एनी बेसेंट

मुख्य उद्देश्य:

भारत के लिए स्वशासन की मांग।


34. लखनऊ समझौता – 1916

1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता हुआ।

यह दोनों संगठनों के बीच राजनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण था।


35. गांधी का भारत में राजनीतिक प्रवेश

महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।

भारत में उनके शुरुआती प्रमुख आंदोलनों में:

  • चंपारण सत्याग्रह

  • अहमदाबाद मिल हड़ताल

  • खेड़ा सत्याग्रह

शामिल थे।


36. चंपारण सत्याग्रह – 1917

चंपारण सत्याग्रह BPSC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

स्थान

चंपारण, बिहार

वर्ष

1917

प्रमुख मुद्दा

नील की खेती और किसानों की समस्याएँ।

प्रमुख व्यक्तित्व

  • महात्मा गांधी

  • राज कुमार शुक्ल

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद

  • ब्रजकिशोर प्रसाद

  • जे. बी. कृपलानी

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से संबंधित स्रोत चंपारण आंदोलन को 1917 से जोड़ते हैं और गांधी के बिहार में इस अभियान को महत्वपूर्ण मानते हैं।

BPSC Fact

चंपारण सत्याग्रह गांधी के भारत में प्रारंभिक प्रमुख सत्याग्रहों में से एक था और बिहार के आधुनिक इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है।


37. रॉलेट एक्ट – 1919

1919 का रॉलेट एक्ट औपनिवेशिक सरकार को राजनीतिक गतिविधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की शक्तियाँ देता था।

इस कानून के विरोध में देशभर में आंदोलन हुए।


38. जलियांवाला बाग हत्याकांड – 1919

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में एकत्रित लोगों पर ब्रिटिश सैनिकों ने गोलीबारी की।

इस घटना ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को गहराई से प्रभावित किया।


39. असहयोग आंदोलन – 1920–1922

महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ।

प्रमुख कार्यक्रम:

  • सरकारी संस्थाओं का बहिष्कार

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

  • खादी को बढ़ावा

  • सरकारी शिक्षण संस्थानों से दूरी

  • जनभागीदारी

चौरी-चौरा की घटना के बाद 1922 में आंदोलन वापस ले लिया गया।


40. स्वराज पार्टी – 1923

स्वराज पार्टी की स्थापना:

  • चित्तरंजन दास

  • मोतीलाल नेहरू

से संबंधित थी।

इसका उद्देश्य विधान परिषदों में प्रवेश करके औपनिवेशिक नीतियों का विरोध करना था।


41. साइमन कमीशन – 1928

साइमन कमीशन 1928 में भारत आया।

इसका विरोध मुख्य रूप से इसलिए हुआ क्योंकि इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था।

इसके विरोध में प्रसिद्ध नारा था:

"Simon Go Back"


42. नेहरू रिपोर्ट – 1928

नेहरू रिपोर्ट मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली समिति से संबंधित थी।

इसमें भारत के लिए संवैधानिक सुधारों का प्रस्ताव रखा गया।


43. लाहौर अधिवेशन – 1929

1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की।

कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया।

26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।


44. सविनय अवज्ञा आंदोलन – 1930

सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में शुरू हुआ।

दांडी मार्च

महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक मार्च किया।

मुख्य मुद्दा:

नमक कानून का विरोध।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • औपनिवेशिक कानूनों का उल्लंघन

  • नमक सत्याग्रह

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

  • जनभागीदारी


45. गांधी-इरविन समझौता – 1931

गांधी-इरविन समझौता 1931 में हुआ।

इसके बाद गांधी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।


46. गोलमेज सम्मेलन

लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन हुए:

  1. प्रथम – 1930

  2. द्वितीय – 1931

  3. तृतीय – 1932

महात्मा गांधी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया।


47. भारत सरकार अधिनियम – 1935

भारत सरकार अधिनियम 1935 औपनिवेशिक भारत का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिनियम था।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • प्रांतीय स्वायत्तता

  • संघीय व्यवस्था का प्रस्ताव

  • प्रांतीय विधानमंडलों का विस्तार

  • मताधिकार का विस्तार


48. 1937 के प्रांतीय चुनाव

भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए।

कांग्रेस ने कई प्रांतों में सरकारें बनाईं।

इस अवधि में भारतीय राजनीतिक नेतृत्व को प्रशासनिक अनुभव प्राप्त हुआ।


49. भारत छोड़ो आंदोलन – 1942

भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त 1942 में शुरू हुआ।

कांग्रेस ने बंबई में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया।

महात्मा गांधी ने "करो या मरो" का आह्वान किया।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • जन आंदोलन

  • हड़तालें

  • प्रदर्शन

  • भूमिगत गतिविधियाँ

  • छात्रों और युवाओं की भागीदारी

  • कुछ क्षेत्रों में समानांतर सरकारों का गठन


50. सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज

सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे।

वे आजाद हिंद फौज (INA) से जुड़े और विदेश से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष को आगे बढ़ाया।

INA और बाद के INA मुकदमों का भारतीय जनमत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।


51. 1946 का नौसैनिक विद्रोह

1946 में रॉयल इंडियन नेवी के भारतीय सैनिकों का विद्रोह हुआ।

इसे Royal Indian Navy Mutiny / Naval Mutiny of 1946 के नाम से जाना जाता है।

BPSC के आधिकारिक syllabus में 1946 के Naval Mutiny को स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल किया गया है।


52. कैबिनेट मिशन – 1946

ब्रिटिश सरकार ने 1946 में कैबिनेट मिशन भारत भेजा।

मुख्य उद्देश्य:

  • भारत में संवैधानिक व्यवस्था पर चर्चा

  • सत्ता हस्तांतरण की दिशा में समाधान तलाशना

  • संविधान निर्माण की प्रक्रिया के लिए रूपरेखा तैयार करना


53. माउंटबेटन योजना – 1947

लॉर्ड माउंटबेटन भारत के अंतिम वायसराय बने।

3 जून 1947 की योजना ने सत्ता हस्तांतरण और भारत के विभाजन की दिशा में रूपरेखा प्रस्तुत की।


54. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम – 1947

ब्रिटिश संसद ने Indian Independence Act, 1947 पारित किया।

इसके परिणामस्वरूप:

  • भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन बने।

  • ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ।

  • सत्ता हस्तांतरण हुआ।

  • ब्रिटिश क्राउन की सर्वोच्चता समाप्त हुई।

भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ।


55. आधुनिक भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण तिथियाँ

वर्षघटना
1757प्लासी का युद्ध
1764बक्सर का युद्ध
1765इलाहाबाद की संधि और दीवानी अधिकार
1773रेगुलेटिंग एक्ट
1784पिट्स इंडिया एक्ट
1793स्थायी बंदोबस्त
1828ब्रह्म सभा/ब्रह्म समाज का गठन
1829सती प्रथा का उन्मूलन
18571857 का विद्रोह
1858भारत सरकार अधिनियम
1875आर्य समाज की स्थापना
1885भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
1905बंगाल विभाजन
1906मुस्लिम लीग की स्थापना
1907सूरत विभाजन
1916होम रूल आंदोलन / लखनऊ समझौता
1917चंपारण सत्याग्रह
1919रॉलेट एक्ट / जलियांवाला बाग
1920असहयोग आंदोलन
1922चौरी-चौरा के बाद असहयोग आंदोलन की वापसी
1923स्वराज पार्टी
1928साइमन कमीशन / नेहरू रिपोर्ट
1929लाहौर अधिवेशन / पूर्ण स्वराज
1930सविनय अवज्ञा आंदोलन / दांडी मार्च
1931गांधी-इरविन समझौता
1935भारत सरकार अधिनियम
1937प्रांतीय चुनाव
1942भारत छोड़ो आंदोलन
1946कैबिनेट मिशन / नौसैनिक विद्रोह
1947भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम / स्वतंत्रता

56. BPSC के लिए महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

सामाजिक सुधारक

  • राजा राममोहन राय

  • ईश्वरचंद्र विद्यासागर

  • स्वामी दयानंद सरस्वती

  • स्वामी विवेकानंद

प्रारंभिक राष्ट्रवादी

  • दादाभाई नौरोजी

  • गोपाल कृष्ण गोखले

  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी

  • फिरोजशाह मेहता

उग्र राष्ट्रवादी

  • बाल गंगाधर तिलक

  • लाला लाजपत राय

  • बिपिन चंद्र पाल

गांधी युग

  • महात्मा गांधी

  • जवाहरलाल नेहरू

  • सरदार वल्लभभाई पटेल

  • राजेंद्र प्रसाद

  • मौलाना अबुल कलाम आजाद

  • सुभाष चंद्र बोस

बिहार से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

  • बाबू कुंवर सिंह

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद

  • राज कुमार शुक्ल

  • ब्रजकिशोर प्रसाद

  • डॉ. श्रीकृष्ण सिंह

  • अनुग्रह नारायण सिंह

  • सच्चिदानंद सिन्हा


57. BPSC Prelims के लिए One-Liner Revision

  1. प्लासी का युद्ध – 1757

  2. बक्सर का युद्ध – 1764

  3. दीवानी अधिकार – 1765

  4. स्थायी बंदोबस्त – 1793

  5. सती प्रथा का उन्मूलन – 1829

  6. 1857 का विद्रोह – मेरठ से प्रारंभ

  7. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना – 1885

  8. बंगाल विभाजन – 1905

  9. मुस्लिम लीग की स्थापना – 1906

  10. सूरत विभाजन – 1907

  11. होम रूल आंदोलन – 1916

  12. चंपारण सत्याग्रह – 1917

  13. रॉलेट एक्ट – 1919

  14. जलियांवाला बाग – 1919

  15. असहयोग आंदोलन – 1920

  16. स्वराज पार्टी – 1923

  17. साइमन कमीशन – 1928

  18. पूर्ण स्वराज – 1929

  19. दांडी मार्च – 1930

  20. भारत सरकार अधिनियम – 1935

  21. भारत छोड़ो आंदोलन – 1942

  22. कैबिनेट मिशन – 1946

  23. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम – 1947

  24. भारत की स्वतंत्रता – 15 अगस्त 1947


58. BPSC Mains के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. प्लासी और बक्सर के युद्धों ने भारत में ब्रिटिश सत्ता के विस्तार को किस प्रकार प्रभावित किया?

  2. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों का भारतीय किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?

  3. 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों और परिणामों की चर्चा कीजिए।

  4. 1857 के विद्रोह में बिहार की भूमिका का वर्णन कीजिए।

  5. सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों ने आधुनिक भारत के निर्माण में क्या भूमिका निभाई?

  6. बंगाल विभाजन के कारणों और स्वदेशी आंदोलन पर उसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।

  7. चंपारण सत्याग्रह का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में क्या महत्व था?

  8. असहयोग आंदोलन के कारणों और परिणामों की व्याख्या कीजिए।

  9. सविनय अवज्ञा आंदोलन की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

  10. भारत छोड़ो आंदोलन की प्रकृति और महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  11. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

  12. स्वतंत्रता प्राप्ति की प्रक्रिया में 1946 के नौसैनिक विद्रोह का क्या महत्व था?

  13. आधुनिक भारत के निर्माण में बिहार के योगदान की चर्चा कीजिए।

  14. औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित किया?

  15. 1857 से 1947 तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विकास की प्रमुख अवस्थाओं की चर्चा कीजिए।


59. BPSC Modern History Preparation Strategy

Prelims के लिए

इन चीजों पर विशेष ध्यान दें:

  • महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • अधिनियम

  • युद्ध

  • गवर्नर-जनरल

  • आंदोलन

  • संस्थाएँ

  • प्रमुख नेता

  • स्थान

  • किसान और जनजातीय आंदोलन

  • बिहार से संबंधित घटनाएँ

Mains के लिए

सिर्फ तथ्य याद करने के बजाय प्रत्येक घटना को इन पाँच बिंदुओं से पढ़ें:

कारण → घटना/प्रक्रिया → प्रमुख नेता → परिणाम → ऐतिहासिक महत्व

उदाहरण:

चंपारण सत्याग्रह

किसानों की समस्या → गांधी का हस्तक्षेप → सत्याग्रह → प्रशासन पर दबाव → किसान आंदोलन और गांधीवादी राजनीति के विकास में महत्व।


60. Quick Revision Timeline

1757 → प्लासी

↓

1764 → बक्सर

↓

1765 → दीवानी अधिकार

↓

1829 → सती प्रथा का उन्मूलन

↓

1857 → विद्रोह

↓

1885 → कांग्रेस

↓

1905 → बंगाल विभाजन

↓

1917 → चंपारण सत्याग्रह

↓

1919 → रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग

↓

1920 → असहयोग आंदोलन

↓

1929 → पूर्ण स्वराज

↓

1930 → सविनय अवज्ञा आंदोलन

↓

1935 → भारत सरकार अधिनियम

↓

1942 → भारत छोड़ो आंदोलन

↓

1946 → कैबिनेट मिशन और नौसैनिक विद्रोह

↓

1947 → स्वतंत्रता


निष्कर्ष

आधुनिक भारतीय इतिहास को BPSC की तैयारी के लिए केवल घटनाओं की सूची के रूप में न पढ़ें। ब्रिटिश विस्तार, औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों, सामाजिक सुधार आंदोलनों, किसान एवं जनजातीय आंदोलनों और राष्ट्रीय आंदोलन के बीच संबंध को समझना अधिक उपयोगी है।

BPSC के आधिकारिक syllabus में Modern India के साथ-साथ बिहार से संबंधित इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन को भी महत्व दिया गया है। इसलिए सामान्य भारतीय इतिहास के साथ बिहार के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन को अलग से revise करना चाहिए।

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