Vande Mataram: Original Song, Hindi Translation, History & Meaning

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Vande Mataram: Original Song, Hindi Translation, History & Meaning
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वन्दे मातरम्: मूल रूप, हिन्दी अनुवाद और सम्पूर्ण जानकारी

भारत के राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम का सबसे शक्तिशाली गीत “वन्दे मातरम्” है। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय जनमानस को स्वतंत्रता की प्रेरणा देने वाला प्रतीक बन गया। इस ब्लॉग पोस्ट में हम वन्दे मातरम् का मूल रूप, हिन्दी अनुवाद, इतिहास, और राष्ट्रीय महत्व एक ही स्थान पर समझेंगे।


वन्दे मातरम् का इतिहास

  • रचनाकार: बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय

  • पहली बार प्रकाशन: 1882 (उपन्यास आनन्दमठ में)

  • कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया गया: 1896

  • राष्ट्रीय गीत घोषित: 1950

"वन्दे मातरम्" स्वतंत्रता संग्राम के समय जोश भरने वाला प्रमुख नारा बन गया। करोड़ों भारतीयों ने इसे अपने संघर्ष का प्रतीक माना।


वन्दे मातरम् — मूल रूप+ हिन्दी अनुवाद

वन्दे मातरम्!
माँ, तुम्हें प्रणाम!

सुजलां सुफलां
मल्यज-शीतलाम्,
शस्य-श्यामलाम्
मातरम्!

माँ! तुम जल से भरी हो, फलों से भरी हो, मल्लिका (मालती) की सुगंध से शीतल हो, और हरियाली में लहलहाती धान की फसलों से भरी हो।


शुभ्र-ज्योत्स्ना
पुलकित-यामिनीम्,
फुल्ल-कुसुमित
द्रुम-दल-शोभिनीम्,
सुहासिनीं
सुमधुर-भाषिणीम्,
सुखदां वरदां
मातरम्!

तुम्हारी चाँदनी रातें मन को पुलकित कर देती हैं; तुम्हारे वृक्षों की शाखाएँ फूलों से शोभित रहती हैं। तुम मुस्कुराती हो, मधुर वाणी बोलती हो, सुख देने वाली और वरदान देने वाली हो।


सप्त-कोटि-कण्ठ-
कल-कल-निनाद-कराले,
द्वि-सप्त-कोटि-भुजैः
धृत-खर-करवाले,
के बोले मा!
तुमि अबले?

माँ! तुम्हारे सात करोड़ बच्चों की आवाज़ गूँज उठती है। चौदह करोड़ भुजाएँ अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। फिर कौन कहता है कि तुम निर्बल हो?


बहुबल-धारिणीं
नमामि तारिणीं,
रिपुदल-वारिणीं
मातरम्!

तुम असीम शक्ति की धारण करने वाली हो, बुराइयों से पार लगाने वाली हो, शत्रु-सैन्य को नष्ट करने वाली हो — ऐसी माँ को मैं नमस्कार करता हूँ।


तुमि विद्या
तुमि धर्म,
तुमि हृदि
तुमि मर्म,

तुम ही ज्ञान हो, तुम ही धर्म (कर्तव्य) हो; तुम ही हृदय में बसी हो, तुम ही जीवन का सार हो।


त्वं हि प्राणा:
शरीरे!
बाहुते
तुमि मा शक्ति,
हृदये
तुमि मा भक्ति,

तुम ही शरीर की प्राण-शक्ति हो; बाँहों में तुम ही शक्ति बनकर हो, और हृदय में तुम ही भक्ति बनकर हो।


तोमारै प्रतिमा
गड़ी
मन्दिरे-मन्दिरे!

तुम्हारी प्रतिमा ही देश के मंदिरों में स्थापित है।


त्वं हि दुर्गा
दश-प्रहरण-धारिणी,
कमला
कमलदल-विहारिणी,
वाणी
विद्या-दायिनी
नमामि त्वाम्,

तुम ही दुर्गा हो, दस अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली;
तुम ही कमला (लक्ष्मी) हो, कमल दल पर विहार करने वाली;
तुम ही वाणी (सरस्वती) हो, ज्ञान देने वाली — तुम्हें नमन है।


नमामि कमलाम्,
अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलाम्
मातरम्!

मैं तुम्हें नमन करता हूँ — पवित्र, अतुलनीय, जल व फल से समृद्ध माँ!


वन्दे मातरम्!
माँ, तुम्हें प्रणाम!



आधिकारिक (Official) वर्शन — जो आज गाया जाता है

भारत सरकार ने केवल पहले दो अंतरे को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी है:

वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां
मल्यज-शीतलाम्,
शस्य-श्यामलाम्
मातरम्!
वन्दे मातरम्!

शुभ्र-ज्योत्स्ना
पुलकित-यामिनीम्,
फुल्ल-कुसुमित
द्रुम-दल-शोभिनीम्,
सुहासिनीं
सुमधुर-भाषिणीम्,
सुखदां वरदां
मातरम्!


निष्कर्ष

“वन्दे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति, मातृभूमि और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है। आज भी यह सर उठाकर देशभक्ति का भाव जगाता है।

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